Wednesday, 24 November 2021

अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा का फल



चंद्रमा वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच का होता है। ज्योतिष् के अनुसार चौथे भाव में चंद्रमा बली और दसवें भाव में मंदा होता है। शनि की राशियों में चंद्र बुरा फल देता है।

आठवें भाव के चंद्रमा को बहुत अच्छा नहीं माना गया है। अत: आपको भी कुछ अनचाहे फलों की प्राप्ति हो सकती है। हांलाकि यहां का चंद्रमा कई शुभ फलों का दाता भी होता है। जिसके कारण आपको व्यापार में लाभ मिलेगा। आप स्वाभिमानी होंगे। आपको विवाह के माध्यम से धन की प्राप्ति होगी। लेकिन यह स्थिति आपको बाचाल बना सकती है।
विषय वासना के प्रति आपकी रुचि अधिक हो सकती है। कामों में अडचने आती हैं। आपको किसी बंधन के कारण दु:ख का सामना करना पड सकता है। यदा कदा किसी-किसी के नजरिए से आप ईर्ष्यालु भी कहे जा सकते हैं। माता मे साथ आपके संबंध अपेक्षाकृत कम ठीक रहेंगे या माता को कष्ट रह सकता है। शत्रुओं के द्वारा परेशानी उत्पन्न होने का भय भी बना रहेगा।
अष्टम भाव के चंद्रमा से आप सदा एक अनजान भय से घिरे रहते हैं, जिसका कोई कारण आपको भी समझ नही आता है. आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी हो सकती है और आपका मनोबल भी गिरा रहता है.
आप सदा दुविधा में घिरे रह सकते हैं और मन में अस्थिरता बनी रहती है. आपको कई बार सही और गलत को पहचानना भी मुश्किल हो जाता है.
चंद्रमा के इस भाव में होने से आप भोगी और विलासी हो सकते हैं और आपके बहुत से संबंध दुनिया से छिपे रह सकते हैं. अनैतिक संबंधो से आपको सचेत रहना चाहिए.
आठवाँ भाव गूढ़ विद्याओ का भी है इसलिए आपकी इनमें रुचि हो सकते हैं और आप गुप्त अथवा डिटेक्टिव एजेंसी से जुड़े काम भी कर सकते हैं. आप जमीन के नीचे से संबंधित वस्तुओ को अपनी आजीविका के साधन बना सकते हैं.
आपको आखों की तकलीफें व अन्य शारीरिक कष्ट हो सकते हैं। आपको सूजन या फेफडे से सम्बंधित किसी तकलीफ का सामना भी करना पड सकता है। जल से संबंधित रोगों का भय आपको आजीवन बना रहेगा। इसके अलावा मनोविकार, चिन्ता नजला जुकाम व खांसी से भी आपको परेशानी हो सकती है.
चंद्र की सावधानियां :
1. जुएं, सट्टे से दूर रहना चाहिए।
2. मांस, मदिरा और अनैतिकता से बचें।
3. माता की सेहत का ध्यान रखें।
4. झूठ न बोलें।
5. किसी भी प्रकार के धोखें से बचें।
क्या करें :
1. घर में चांदी की चीजें रखें।
2. एकादशी का व्रत रखें।
3. अच्छे से श्रद्धा करें और बुजुर्गों और बच्चों के पैर छूकर आशीर्वाद लें।
4. नाक छिदवाकर उसमें 43 दिनों के लिए चांदी का तार डालें।
5. मंदिर में चना व दाल अर्पण करें। सूर्य, गुरु और मंगल की वस्तुएं दान करें।

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