Monday, 30 August 2021

🦚श्री कृष्ण की तरह आपकी कुंडली में भी हो यह योग तो कर सकते हैं चमत्कार🦚

 


🦚श्री कृष्ण की तरह आपकी कुंडली में भी हो यह योग तो कर सकते हैं चमत्कार🦚

श्री कृष्ण की कुण्डली बताती है कि इनका जन्म भाद्र मास कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में महानिशीथ काल में वृषभ लगन में हुआ था।

उस समय बृषभ लग्न की कुंडली में लग्न में चन्द्र और केतु, चतुर्थ भाव में सूर्य, पंचम भाव में बुध एवं छठे भाव में शुक्र और शनि बैठे हैं।

जबकि सप्तम भाव में राहू, भाग्य स्थान में मंगल तथा ग्यारहवें यानी लाभ स्थान में गुरु बैठे हैं। कुंडली में राहु को छोड़ दें तो सभी ग्रह अपनी उच्च अवस्था में हैं। कुंडली देखने से ही लगता है कि यह किसी महामानव की कुंडली है।

ग्रहों की इन शुभ स्थितियों के कारण ही श्री कृष्ण ने अपनी अद्भुत शक्तियों का प्रदर्शन किया। ऐसी कुंडली बड़ी दुर्लभ मानी जाती है। इनकी कुंडली की तरह अगर किसी व्यक्ति की कुंडली हो तो वह भी बड़े कारनामे कर सकता है।

जानिए जन्माष्टमी के दिन किन उपायों से दूर होते हैं कष्ट और प्राप्त होता है मनचाहा वरदान-

1. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन घर पर गाय या बछड़े की मूर्ति लाएं। मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
2. जन्माष्टमी के दिन कन्याओं के बुलाकर खीर खिलाएं। ऐसा लगातार पांच शुक्रवार तक करें। मान्यता है कि ऐसा करने से नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलती है और आमदनी में वृद्धि होती है।
3. जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को चांदी की बांसुरी अर्पित करें। पूजा के बाद इस बांसुरी को तिजोरी या पर्स में रखें। मान्यता है कि ऐसा करने से धन लाभ होता है।
4. जन्माष्टमी के दिन राधा-माधव को 56 भोग लगाएं। कहते हैं कि ऐसा करने से श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
5.जन्माष्टमी के दिन शाम को तुलसी पूजा करनी चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने कर्ज से मुक्ति मिलती है।
6. जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे दूध में केसर मिलाकर श्रीकृष्ण का अभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति :
श्री कृष्ण चन्द्र कृपालु भजमन, नन्द नन्दन सुन्दरम्।
अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥
सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्।
मुख चन्द्र द्विति नख चन्द्र द्विति, पुष्पित निकुंजविहरिणम।।
मुस्कान मुनि मन मोहिनी, चितवन चपल वपु नटवरम।
वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम।।
वृषभान नंदिनी वामदिशि, शोभित सुभग सिहासनम।
ललितादि सखी जिन सेवहि करि चवर छत्र उपासनम।।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ. 

Wednesday, 25 August 2021

पितृ दोष के लक्षण, निवारण, क्यों होता है पितृदोष,



शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं. व्यक्ति की कुण्डली में एक ऐसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है. इस दोष को पितृदोष के नाम से जाना जाता है.


🟡⚫पितृ दोष के लक्षण 🟡⚫

- विवाह ना होना या विवाह होने में बहुत समस्या होना - वैवाहिक जीवन में कलह होना

- परीक्षा में बार-बार फेल होना

- नौकरी का ना मिलना या बार-बार नौकरी छूटना

- गर्भपात या गर्भधारण में बहुत ज्यादा समस्या

- बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना - मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना

- अपने आप पर विश्वास ना होना या कोई निर्णय न ले पाना

- बात-बात पर क्रोध आना

- बहुत मेहनत के बावजूद व्यापर ना चलना

✴️क्यों होता है पितृदोष? ✴️

- पूर्व जन्म में अगर माता-पिता की अवहेलना की गई हो

- अपने दायित्वों का ठीक तरीके से पालन न किया गया हो

- अपने अधिकारों और शक्तियों का दुरुपयोग किया गया हो

- तो इसका असर जीवन पर दिखने लगता है

- व्यक्ति को जीवन में हर कदम पर असफलता मिलती है

📣किन योगों के होने पर पितृ-दोष होता है? 📣

- कुंडली में राहु का प्रभाव ज्यादा हो तो इस तरह की समस्या हो जाती है

- राहु अगर कुंडली के केंद्र स्थानों या त्रिकोण में हो

- अगर राहु का सम्बन्ध सूर्य या चन्द्र से हो - अगर राहु का सम्बन्ध शनि या बृहस्पति से हो

- राहु अगर द्वितीय या अष्टम भाव में हो

🕉कैसे करें पितृ-दोष का निवारण? 🕉

- अमावस्या के दिन किसी निर्धन को भोजन कराएं, खीर जरूर खिलाएं
- पीपल का वृक्ष लगवाएं और उसकी देखभाल करें
- ग्रहण के समय दान अवश्य करें
- श्रीमदभगवद्गीता का नित्य प्रातः पाठ करें
- अगर मामला ज्यादा जटिल हो तो, श्रीमद्भागवद का पाठ कराएं
- अपने कर्मों को जहां तक हो सके शुद्ध रखने का प्रयास करें
- पितृ दोष को ख़त्म करने के लिए हर अमावस्या पर अपने पूर्वजों और पितरों के नाम से दवा, वस्त्र व भोजन का दान करना चाहिए।
- हर बृहस्पतिवार और शनिवार की शाम पीपल की जड़ में जल अर्पण करें और उसकी सात परिक्रमा करें शुक्ल पक्ष के रविवार के दिन सुबह के समय भगवान सूर्य को तांबें के लोटे में जल में गुड़, लाल फूल, रोली आदि डालकर अर्पण करना शुरू करें ।
- माता पिता और उनके समान बुजुर्ग व्यक्तियों का चरण स्पर्श करें और उनसे आशीर्वाद लें।
- पितृ दोष मुक्ति के लिए अपने कुलदेवता और इष्ट देव की सदा पूजा करते रहें।
- किसी गरीब कन्या के विवाह में मदद करें या किसी की बीमारी में उसकी सहायता करें। 

बसंत पंचमी

  बसंत पंचमी यानी मां सरस् ‍ वती की पूजा का यह पर्व इस बार 5 फरवरी दिन शनिवार को देशभर में मनाया जाएगा। इस दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। 5 फरवर...