Wednesday, 25 August 2021

पितृ दोष के लक्षण, निवारण, क्यों होता है पितृदोष,



शास्त्र के अनुसार सूर्य तथा राहू जिस भी भाव में बैठते हैं, उस भाव के सभी फल नष्ट हो जाते हैं. व्यक्ति की कुण्डली में एक ऐसा दोष है जो इन सब दु:खों को एक साथ देने की क्षमता रखता है. इस दोष को पितृदोष के नाम से जाना जाता है.


🟡⚫पितृ दोष के लक्षण 🟡⚫

- विवाह ना होना या विवाह होने में बहुत समस्या होना - वैवाहिक जीवन में कलह होना

- परीक्षा में बार-बार फेल होना

- नौकरी का ना मिलना या बार-बार नौकरी छूटना

- गर्भपात या गर्भधारण में बहुत ज्यादा समस्या

- बच्चे की अकाल मृत्यु हो जाना - मंदबुद्धि बच्चे का जन्म होना

- अपने आप पर विश्वास ना होना या कोई निर्णय न ले पाना

- बात-बात पर क्रोध आना

- बहुत मेहनत के बावजूद व्यापर ना चलना

✴️क्यों होता है पितृदोष? ✴️

- पूर्व जन्म में अगर माता-पिता की अवहेलना की गई हो

- अपने दायित्वों का ठीक तरीके से पालन न किया गया हो

- अपने अधिकारों और शक्तियों का दुरुपयोग किया गया हो

- तो इसका असर जीवन पर दिखने लगता है

- व्यक्ति को जीवन में हर कदम पर असफलता मिलती है

📣किन योगों के होने पर पितृ-दोष होता है? 📣

- कुंडली में राहु का प्रभाव ज्यादा हो तो इस तरह की समस्या हो जाती है

- राहु अगर कुंडली के केंद्र स्थानों या त्रिकोण में हो

- अगर राहु का सम्बन्ध सूर्य या चन्द्र से हो - अगर राहु का सम्बन्ध शनि या बृहस्पति से हो

- राहु अगर द्वितीय या अष्टम भाव में हो

🕉कैसे करें पितृ-दोष का निवारण? 🕉

- अमावस्या के दिन किसी निर्धन को भोजन कराएं, खीर जरूर खिलाएं
- पीपल का वृक्ष लगवाएं और उसकी देखभाल करें
- ग्रहण के समय दान अवश्य करें
- श्रीमदभगवद्गीता का नित्य प्रातः पाठ करें
- अगर मामला ज्यादा जटिल हो तो, श्रीमद्भागवद का पाठ कराएं
- अपने कर्मों को जहां तक हो सके शुद्ध रखने का प्रयास करें
- पितृ दोष को ख़त्म करने के लिए हर अमावस्या पर अपने पूर्वजों और पितरों के नाम से दवा, वस्त्र व भोजन का दान करना चाहिए।
- हर बृहस्पतिवार और शनिवार की शाम पीपल की जड़ में जल अर्पण करें और उसकी सात परिक्रमा करें शुक्ल पक्ष के रविवार के दिन सुबह के समय भगवान सूर्य को तांबें के लोटे में जल में गुड़, लाल फूल, रोली आदि डालकर अर्पण करना शुरू करें ।
- माता पिता और उनके समान बुजुर्ग व्यक्तियों का चरण स्पर्श करें और उनसे आशीर्वाद लें।
- पितृ दोष मुक्ति के लिए अपने कुलदेवता और इष्ट देव की सदा पूजा करते रहें।
- किसी गरीब कन्या के विवाह में मदद करें या किसी की बीमारी में उसकी सहायता करें। 

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