Monday, 15 November 2021

अष्टम भाव में स्थित केतू का फल





यहां स्थित केतू के कुछ शुभ फल कहे गए हैं। अत: आप पराक्रमी और सदैव उद्यम करने वाले व्यक्ति हो सकतें हैं। आप अपने कामों के प्रति गंभीर रहते हैं। खेलकूद में भी आपकी गहरी रुचि होगी। आप सुखी रहेंगे। आप शीलवान व्यक्ति हैं। आपको खूब धनलाभ होगा। कई मामलों में आपको सरकार से भी धन की प्राप्ति हो सकती है।

केतु अष्टम भाव में उच्च या शुभ राशिगत होने पर जातक दीर्धायु जीवन पाने वाला होता है। केतु मेष, वृष, मिथुन, कन्या, वृश्चिक एवं धनु राशि में हो तो अचानक धनलाभ कराने वाला होता है। कोई कोई जातक विरासत या अन्य सूत्र से संपत्ति की प्राप्ति कराने वाला होता है। अशुभ होने पर लोगों के घृणा का पात्र, बुरे लोगों की संगति करने वाला, चालाकी से दूसरों का धन हरपने वाला होता है।
जातक वाहन आदि से गिरकर कष्ट पाने वाला, अर्श या बबासीर आदि का रोगी एवं अल्पायु जीवन पाने वाला होता है। अशुभ केतु अष्टमस्थ होने पर धन का नाश कराने वाला होता है।ब लवान होने पर आयु लंबी होती है एवं ज्योतिष-तंत्र या काला जादू इत्यादि का जानकार होता है तथा ईश्वर या अध्यात्म में तल्लीन होता है।
अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल देने वाला माना गया है। अत: आपको दुष्टजनों की संगति अधिक प्रिय होगी। आप लोभी और चालाक हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को कष्ट पहुंचाने में आपको कोई हिचक नहीं होगी। आप जाने अंजाने कुछ ऐसे काम कर सकते हैं जो पाप संज्ञक हो सकते हैं। कभी-कभी आपके द्वारा किए कार्यों से विवेकहीनता परिलक्षित हो सकती है।
यहां स्थित केतू आपको गुह्यरोग, मुखरोग या दंत रोग देता है। यह स्थिति आर्थिक मामलों के लिए अच्छी नहीं होती। दूसरों को दिए हुए अपने द्रव्य को मिलने में रुकावट होती है। धन आगमन में व्यवधान आता है। दूसरों के धन और जन के प्रति आशक्ति हो सकती है। वाहन आदि के माध्यम से कष्ट मिल सकता है। मित्रों से विवाद या अलगाव भी हो सकता है।
केतु के विशेष उपाय -
लहसुनिया या लपीज़ लजूली पहने या पांच धातु या सप्त धातु का छल्ला पहनें। गणेश जी की पूजा या गणेश चतुर्थी का व्रत करें। पुत्र, भतीजे, भाजें, दोस्ते, पोते और जवाई की सेवा करें। कानो में सोना पहने। तिल (काले-सफेद) दान करें या जल प्रवाह करें। काले सफेद कम्बल धर्म स्थान में या किसी गरीब को दान दें। नीबू, केला इमली (खट्टी चीजें) दान देना या जल प्रवाह करे। दहेज में दो पलंग और सोने की बेजोड़ अंगुठी लें। कुत्ता पालें या कुत्ते के सेवा करे।
केतु के विषय में-
केतु अशुभ होने पर क्रूर एवं निर्दयी ग्रह कहा गया है। इनका वार गुरुवार है। ये धनु राशि मे उच्च एवं मिथुन राशि इनका नीच स्थान है। अश्विनी, मघा एवं मुला इनके तीन नक्षत्र है। रवि, चंद्र तथा मंगल इनके मित्र ग्रह है।
कैसे होता केतु खराब?
* पुरखों का मजाक उड़ाना, अच्छे से श्राद्धकर्म नहीं करना।
* गृहकलह या घर-परिवार के लोगों से झूठ बोलना।
* माँ दुर्गा, गणेश जी और हनुमान जी का अपमान करना या उनका मजाक उड़ाना।
* घर का वायव्य कोण खराब है तो केतु भी खराब होगा।
* तंत्र-मंत्र, जादू-टोना में विश्वास करने से भी केतु खराब होकर बुरा फल देता है।
* संतानों से अच्छा व्यवहार नहीं रखने पर भी केतु खराब हो जाता है।
केतु खराब की निशानी :
* कुंडली में मंगल के साथ केतु का होना बहुत ही खराब माना गया है।
* चन्द्र के साथ होने से चन्द्रग्रहण माना जाता है।
* मंदा केतु पैर, कान, रीढ़, घुटने, लिंग, किडनी और जोड़ के रोग पैदा कर सकता है।
* मन में हमेशा किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
* नींद में चमककर उठता है व्यक्ति। नींद कुत्ते जैसी हो जाती है।
* व्यक्ति भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, जादू-टोने पर विश्वास करने लगता है।
केतु की बीमारी :
* पेशाब की बीमारी।
* संतान उत्पति में रुकावट।
* सिर के बाल झड़ जाते हैं।
* शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है।
* केतु के अशुभ प्रभाव से चर्म रोग होता है।
* कान खराब हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
* कान, रीढ़, घुटने, लिंग, जोड़ आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है।




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